हम दीवाने, गज़ल

कैसे हुए हम ऐसे, खाग के दीवाने ।

रोशनको करे अन्धेरा, ऐसे राग के दीवाने ।

तक्लीफ-ए-मोहबत तो होती है

पर हम तो उसी फिराकके दीवाने ।

दूर तलक दिलमें किसिके शोले जगाए,

हम उस चिरागले दीवाने ।

सर्दीयोकि मौशममें जमाहुवा है एक झील

हम ऐसे एक बागके दीवाने ।

और जल्ता हुवा जीगर बर्फ बन्जाये

पलभरमें हम ऐसी कोहि आगके दीवाने ।

काम छोड कर भवरा, आजाद उड्ने लगे

हम  ऐसे कोही परागके दीवाने ।

इन्शानी कर्दे कोइ फकीरको,भी

हम वैसे कोहि दागके दीवाने ।

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